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Kaali by Sanjay Tripathi – Book Review

Author: Sanjay Tripathi
Publisher: ShriHind Publisher

Concept/ Storyline
Writing Style
Narration
Cover/Title

Summary

It felt like watching a Bollywood movie with lots of suspense, and that too in Hindi. The way the story started, to how Kaali Planned the revenge, to the story of Maha Kaali that the author added in between, it’s really interesting.

3.5

Review:

Kaali – Ek Rahasya Katha by Sanjay Tripathi published by @shrihindpublications is a wonderful blend of thriller and Mystery. It’s a story of Kali who pledges to take revenge, it’s a story that shows a reality of our society, a story that will make you angry, that will make you curious. It’s a story of Kaali who punished the Culprits, How?.

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It felt like watching a Bollywood movie with lots of suspense, and that too in Hindi. The way the story started, to how Kaali Planned the revenge, to the story of Maha Kaali that the author added in between, it’s really interesting.

The plot of the story is good, I liked the way the suspense unfolds with every chapter. It’s a well-narrated story filled with drama and dialogues. The characters are well developed by the author that one could easily relate to. It’s a good story filled with twists that you will enjoy. Not to forget, a surprising climax. Overall, it’s an interesting read.

Summary:

 कैसे कोई लड़की एक सामग्री की तरह इस्‍तेमाल की जाती है और यह देख सुनकर उनकी अपनी ही कौम का खून क्‍यों नहीं खोलता ? स्त्रियों की अपनी कौम है जिसे अबला, नाजुक और न जाने कितने विश्‍लेषण से नवाजा गया और इस कौम ने इसे सहज स्‍वीकार भी कर लिया । क्‍या आधे लोग, आधे लोगों के उपभोग के लिए है? क्‍या एक का काम दूसरे को सुख देना हैं? जिसकी अस्मिता जाए उसका नाम छिपाया जाय ताकि बदनामी न हो, पर स्‍त्री कौम यह क्‍यों नहीं कहती कि नाम इसलिए नहीं बताया जा रहा है कि वह अब सबका नाम हैं। पीडि़त की वय की सभी लड़कियाँ उसे अपना ही नाम क्‍यों नहीं दे? क्‍यों उन्‍हें नहीं लगता कि जो उसके साथ घटा वह मुझे लगता है मेरे साथ घटा। यही समानुभुति आवश्‍यक है और जब तक यह नहीं आयेगी तब तक आधी आबादी, आधी आबादी के रहमों करम पर रहेगी। एक पर बीते और दूसरे महसूस करे, वह पीडि़त के साथ खड़ा हो, उसके लिए लड़े और जब तक यह नहीं होगा तब तक हिमाकत करने वाले, दुस्‍साहस करने वाले कैसे रूकेंगे। काली कहानी है ऐसे ही दुस्‍साहसियों को दंड देने की, पर कैसे? यही एक रहस्‍य कथा है। एक ऐसी कथा जो काल्‍पनिक होते हुए भी सच के करीब है। आज के न सहीं पर कल के करीब है । About the Author – संजय त्रिपाठी – मेरा राम मेरा देश, मथुराईश और नीलकंठ प्रकाशित हुई, जिनमें धर्म और इतिहास हाथ में हाथ डाले चलते हैं। शांकरी इनकी चौथी पुस्‍तक थी जिसमें उन्‍होंने नर्मदा को किवदंतियों से परे रख कर उसके बारे में खुद के और लोगों के वास्‍तविक अनुभव के आधार पर लिखा था, काली इनकी पांचवी कृति है जिसमें लड़कियों पर घटते यौन अत्‍याचार और प्रतिकार स्‍वरूप उठती समानुभुति के कारण लिए जाने बाले बदले की कहानी है।

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